यदि किसी दुर्घटना में शरीर का कोई अंग कटकर अलग हो जाए और समय पर उचित उपचार न मिले, तो उसे दोबारा जोड़ पाना बेहद कठिन हो जाता है। हालांकि, उज्जैन जिले के एक युवक के मामले में समय, विशेषज्ञता और सही निर्णय ने चमत्कार कर दिखाया।
घटना 9 जून की रात करीब 11:30 बजे की है। एक विवाह समारोह में हुए विवाद को शांत कराने पहुंचे युवक का दायां हाथ तलवार से कटकर शरीर से पूरी तरह अलग हो गया। परिजन उसे तत्काल स्थानीय अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के दौरान बड़े टांकों से हाथ को ऊपरी तौर पर जोड़ दिया गया, लेकिन नसों और दोनों आर्टरी को नहीं जोड़ा गया। इससे लगातार खून बहता रहा और स्थिति गंभीर बनी रही।
इसके बाद मरीज को इंदौर रेफर किया गया, लेकिन रात का समय होने के कारण दो निजी अस्पतालों में भर्ती नहीं किया गया। अंततः विजय नगर स्थित एक निजी अस्पताल में तड़के करीब 3:30 बजे मरीज को भर्ती कर तत्काल सर्जरी शुरू की गई।
करीब चार घंटे बाद कटे हुए हाथ का सफल ऑपरेशन कर उसे दोबारा जोड़ दिया गया। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण मरीज की हालत बेहद नाजुक थी, इसलिए सर्जरी को दो चरणों में किया गया। ऑपरेशन करने वाले सर्जन डॉ. अश्विनी दास के अनुसार, आमतौर पर ऐसे मामलों में कटे अंग को साफ प्लास्टिक बैग में रखकर बर्फ में सुरक्षित करना चाहिए और छह घंटे के भीतर विशेषज्ञ सर्जन तक पहुंचाना जरूरी होता है, ताकि कोशिकाएं जीवित बनी रहें।
इस केस में हाथ को अस्थायी रूप से जोड़ देने के कारण चुनौतियां बढ़ गई थीं। पहले चरण में नसों और दोनों आर्टरी को जोड़ा गया, इसके बाद मरीज को रिकवरी के लिए एक सप्ताह दिया गया। दूसरे चरण में शेष सर्जरी पूरी की गई। तीन सप्ताह बाद प्लास्टर हटाकर फिजियोथैरेपी शुरू की जाएगी ताकि हाथ सामान्य रूप से कार्य कर सके।
इस जटिल सर्जरी में डॉ. दास के साथ ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आशीष गोयल और एनेस्थेटिस्ट डॉ. विवेक चंद्रावत शामिल थे।
महत्वपूर्ण जानकारी
डॉक्टरों के अनुसार, यदि किसी का अंग कट जाए तो उसे साफ प्लास्टिक बैग में रखकर बर्फ में सुरक्षित करें, बहते खून को रोकें और तुरंत अस्पताल पहुंचें। छह घंटे के भीतर बड़े अस्पताल में पहुंचने पर अंग रिप्लांटेशन संभव हो सकता है।





